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अंकिता भंडारी हत्याकांड: जब सत्ता के भीतर से सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार क्यों खामोश है?

✍️ रिषेंद्र महर


उत्तराखंड की जनता ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उसे यह पूछना पड़ेगा कि क्या न्याय इस राज्य में सिर्फ़ आम लोगों के लिए है? और क्या सत्ता से जुड़े लोगों के लिए कानून अलग होता है?

अंकिता भंडारी हत्याकांड कोई साधारण अपराध नहीं था। यह एक नैतिक, प्रशासनिक और राजनीतिक विफलता की कहानी है - जिसमें एक बेटी की हत्या के बाद भीसवालों को दबाने की कोशिश की गई।


जब सत्ता के भीतर से सच बोलने लगे


हाल ही में बीजेपी के पूर्व विधायक की कथित पत्नी द्वारा किया गया एक LIVE वीडियो सामने आया। इस वीडियो में उर्मिला सुरेश राठौर ने गंभीर दावा किया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस VIP को बचाया गया,वह कोई और नहीं बल्कि Dushyant Gautam हैं - जो भारतीय जनता पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और उत्तराखंड प्रभारी बताए जाते हैं।

यह कोई विपक्षी आरोप नहीं है। यह दावा सत्ता के उसी परिवार से आ रहा है,जो कल तक इस सरकार का हिस्सा था।


ऑडियो क्लिप्स और ‘गट्टू’ का नाम


इतना ही नहीं,कुछ ऑडियो क्लिप्स भी सार्वजनिक की गई हैं,जिनमें पूर्व विधायक सुरेश राठौर खुद ‘गट्टू’ नाम लेकर उस VIP की पहचान स्वीकार करते सुने जा रहे हैं।

अब सवाल यह नहीं है किये आरोप किसने लगाए। सवाल यह है कि -

  1. सरकार इन ऑडियो क्लिप्स की स्वतंत्र जाँच क्यों नहीं करवा रही?

  2. सच सामने लाने से डर क्यों?


बीजेपी के पूर्व विधायक की कथित पत्नी उर्मिला सुरेश राठौर का वीडियो । सोर्स : फेसबुक लाइव

रिज़ॉर्ट पर चला बुलडोज़र - न्याय या साज़िश?


अंकिता भंडारी के साथ जिस रिज़ॉर्ट में अपराध हुआ,उसे कोर्ट के अंतिम निर्णय से पहले बुलडोज़र से गिरा दिया गया।

मैं सीधा सवाल पूछता हूँ -

  • यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई?

  • क्या सबूतों को सुरक्षित किया गया था?

  • या फिर सबूतों को मिटाने की जल्दबाज़ी थी?

किसी भी सभ्य लोकतंत्र में अपराध स्थल को गिराना जाँच प्रक्रिया पर सीधा हमला होता है।


मुख्यमंत्री से सवाल - चुप्पी क्यों?


मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami जी,यह सब आपके कार्यकाल में,आपकी सरकार के संरक्षण में हुआ।

  • VIP को बचाया गया

  • सबूतों पर बुलडोज़र चला

  • सवाल पूछने वालों को चुप कराने की कोशिश हुई

और आपने…कुछ नहीं किया।

क्या यही “डबल इंजन सरकार” का न्याय है?


न्याय का डर क्यों?


अगर सरकार को अपने ऊपर भरोसा है,तो वह स्वतंत्र CBI जाँच से क्यों डरती है?

CBI जाँच से सच ही तो सामने आएगा या फिर सत्ता को डर है कि सच बहुत ऊपर तक जाएगा?


मेरा स्पष्ट पक्ष


मैं, रिषेंद्र महर,अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ा हूँ। मैं उत्तराखंड की उस हर बेटी के साथ खड़ा हूँ जो आज पूछ रही है -

“अगर मेरे साथ ऐसा हुआ,तो क्या मुझे भी न्याय मिलेगा?”

मैं साफ़ कहता हूँ -

  • न कोई VIP कानून से ऊपर है

  • न सत्ता न्याय को दबा सकती है

  • न सच को हमेशा के लिए छुपाया जा सकता है

या तो इस मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच होगी,या फिर उत्तराखंड की जनता इस चुप्पी का जवाब सड़कों से लेकर सदन तक देगी।

अंकिता को न्याय मिलकर रहेगा।

क्योंकि न्याय को रोका जा सकता है,लेकिन खत्म नहीं किया जा सकता।

 
 
 

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